Jun 22, 2014

ये कैसी कश्मकश है....

Saurabh Chawla | 6:30 PM |
a boy in love
Image source: here
थम जाता है यु मंज़र मेरा
जो थाम लेते हो बांह मेरी
ये कैसी कश्मकश है जो
राह में आके रुक गयी तेरी

बेसवाल जवाबों को ढूंढने
मैं खड़ा रहा गलियों में तेरी  
ये कैसी कश्मकश है जो
राह में आके रुक गयी तेरी

साँसें जो यूँ रुक सी जाती
जो इक झलक दिख जाए तेरी
ये कैसी कश्मकश है जो
राह में आके रुक गयी तेरी

धुंधले से लगते अरमान मेरे
अश्कों से भीगी ये पलकें मेरी
ये कैसी कश्मकश है जो
राह में आके रुक गयी तेरी


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10 comments:

  1. Third verse is lovely. Good to read a hindi poem from your pen.

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    Replies
    1. Thanks a lot Saru :) Its wonderful you liked it :) Thanks a lot :) will compose more of hindi poems :)

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  2. I loved these lines the most
    धुंधले से लगते अरमान मेरे
    अश्कों से भीगी ये पलकें मेरी

    A beautiful poem :) I should have written the entire comment in Hindi I guess :D

    ReplyDelete
    Replies
    1. No not a problem Anmol :) Thanks a lot for reading :) Glad you liked it :)

      Delete
  3. बेसवाल जवाबों को ढूंढने
    मैं खड़ा रहा गलियों में तेरी...wah kya baat hai Saurabh! Bahut khoob:)

    ReplyDelete

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